ज़रा सोचिए: अमेरिका के दो हाई-स्कूल छात्र—और खबर के मुताबिक दोनों को कोडिंग तक नहीं आती थी—लगभग सिर्फ OpenAI के ChatGPT के भरोसे एक ऐप बनाते हैं और उसे 78 अरब वॉन में बेच देते हैं... रुको... सच में ऐसा हो सकता है? मैं इस वक्त जिस काली-सी विंडो में GPT चला रहा हूँ, वही इतनी बड़ी चीज़ें भी कर सकता है?

वाह... पहला झटका रकम ने दिया। दूसरा झटका “कोडिंग न जानने वाले हाई-स्कूल छात्रों” ने। उसी दिन मुझे Cal AI नाम के ऐप के बारे में पता चला। एक मिनट... बस फोटो खींचो और AI आराम से खाने की कैलोरी गिन दे? अरे बाप रे, ये तो गज़ब की चीज़ है.... शायद वही खबर मेरे दिमाग में जरूरत से ज़्यादा गहरे धँस गई थी।

वियतनाम के न्हा ट्रांग में एक परदेसी की तरह रह रहे इस मालिक—यानी मैं—के दिमाग में अचानक एक ख्याल आया। हाँ यार... मेरे फोन में वियतनामी कीबोर्ड तक नहीं है। लेकिन अगर मैं बस दुकान का बोर्ड फोटो खींचूँ और कोई भला-सा AI कह दे, “ये इस तरह का रेस्तराँ है, और इस जगह के बारे में ये बातें जान लो~”, तो कितना बढ़िया होगा?

मैंने वही कल्पना ज्यों की त्यों GPT के सामने रख दी। “ओए, ये बन सकता है क्या?” और फिर... टिंग-टॉन्ग!!! “बिल्कुल बन सकता है~~~~~~” ... उस वक्त मुझे नहीं पता था। कि वही एक छोटा-सा जवाब... ...मेरे पूरे छह महीने लंबे पहले महान “खुद ही गड्ढा खोदो” अभियान की पहली फावड़ी बनने वाला था।